
संवाददाता/नासिक : मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में श्री हंस कल्याण धाम आश्रम, शिवाजी नगर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत पुराण कथा महायज्ञ के सातवें और अंतिम दिन मंगलवार को कथा व्यास साध्वी हरीशा बाई जी ने कहा कि भक्त सुदामा और श्री कृष्ण की मित्रता पुरी दुनिया में एक जीवंत उदाहरण है। भगवान श्रीकृष्ण ने छोटे-बड़े और अमीरी-गरीबी को भुलाकर मित्र सुदामा के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया। सद्भावना का संदेश दिया।
कथा व्यास साध्वी हरीशा बाई जी ने कथा सार बताते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अपने जीवन काल में कर्मयोग का मार्ग प्रसस्त कर समस्त जीव-जगत के लिए कर्म करने की प्रेरणा दी। भक्त के लिए भगवान और मित्र के सच्चे मित्र का बहुत बड़ा उदाहरण है।तीर्थनगरी हरिद्वार से पधारी हुई साध्वी मैत्रेयी बाई, साध्वी पुजीता बाई और साध्वी कमला बाई और उज्जैन से पधारे महात्मा अमरबेलानन्द ने मंच पर उपस्थित होकर स्टेज की शोभा बढाया। महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण सर्वगुण संपन्न और चौसठ कलाओं से परिपूर्ण थे| वे एक कुशल राजनीतिज्ञ भी थे|
प्रसिद्ध भजन गायक कलाकार बालकिशोर ने-साँसो की माला पे, सिमरू मैं पी का नाम और जागो ए दुनिया वालो, सतगुरू जगा रहे है, तथा धुरन्धर चैहान ने जागो दुनिया वालो और जानो सत्यनाम और रवि टिकेकर ने हरि बिन कौन गति मेरी जैसे अनेक सद्भावना और आध्यात्मिक ज्ञान से ओत-प्रोत सुन्दर भजनों पर समस्त भ्क्तसमुदाय देर रात तक झुमते रहे। तथा क्षेत्रीय कलाकरों द्वारा अनेक मराठी भजन गाये गये। दिल्ली से आये हुए सभी कलाकारों का पारंपरिक तरीके से संगीत मंच पर स्वागत किया गया |
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रथमेश भाउ (उपमहापौर, नासिक), श्रीमती योगिता ताई आहेर ( नगर सेवक), और साथ में अनेक गणमाण्य लोग उपस्थित थे। मुख्य अतिथि प्रथमेश भाउ ने सबको कथा के प्रति पूरी श्रद्धा और विश्वास रखने को प्रेरित किया | मुख्य अतिथियों ने भी समस्त श्रद्धालुओं के समक्ष अपने-अपने विचार रखे। मुख्य अतिथि ने कथा व्यास साध्वी हरीशा बाई जी का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया। तत्पश्चात मुख्य अतिथियों का संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ता उत्तम भंदुरे ने पुष्प-गुच्छ देकर स्वागत किया। कार्यक्रम में भाष्कर भालेराव, प्रशांत काश्मीर. गांगुड़े, भाउसाहेब बौराड़े,चांगदेव अरिंगळे, गौतम भंदूरे, श्याम काश्मीर, कैलाश खोड़े, शैलेश, मनोज निकम आदि अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे। कार्यक्रम सायं 6 बजे से प्रारम्भ होकर रात्रि 10 बजे तक चला। तत्पष्चात सबने आरती और भोजन प्रसाद का भी खुब लाभ उठाया। मंच संचालन का कार्य जयराम गांगुणे ने किया।































