गॉव की रौनक वापस लाने की दिशा मे यह प्रयास क्षेत्र मे एक उदाहरण बनेगा ! सतपाल महाराज

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भगवान सिंह रावत,पौड़ी (उतराखंड)- उत्तरांचल एसोसिएशन ऑफ़ नार्थ अमेरिका और सेव इंडियन फॉरमर्स की मदद से अब दिल्ली विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट छात्र कैंप लगाकर ग्रामीण बच्चों के बौद्धिक स्तर को अपनी तकनीकी से निखारने का प्रयास करेंगें, आपको बताते चले किताब फाउंडेशन  एक कैंप लगा कर ग्रामीण बच्चों के बौद्धिक स्तर सुधारने के लिए आयोजन कर रहा है,गौरतलब हो पहाड़ों में अधिकांश अभिभावक का जागरूक नहीं होना बच्चों का सर्वांगीण विकास के लिए बाधित हो रहा है, जिसके लिए अब दिल्ली विश्वविद्यालय के युवाओं ने बौद्धिक स्तर को निखारने की अपनी अलग तकनीक के चलते पिछले कुछ समय से उत्तराखंड मे अलग-अलग जगह कैम्प लगाकर इस तरह के कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं, अब इसी तरह चौबट्टा खाल क्षेत्र मे भी एक कैंप का आयोजन किया जा रहा है, इस कैम्प मे दिल्ली विश्वविद्यालय के लगभग दस ग्रेजुएट युवाओं की एक टीम होगी जो लगभग दस दिन तक ग्रामीण बच्चों के बौद्धिक स्तर को अपनी तकनीकी से निखारने का प्रयास करेंगी, इस बारWhatsApp Image 2017-12-07 at 12.27.15 PM किताब फाउंडेशन का यह कैम्प पूर्व आयोजित कैम्पों से कुछ हट कर नया होगा, जिसमे विलेज टूर के माधय्म से उत्तराखंड पर्यटन को बढ़ावा देना भी शामिल किया गया है, विलेज टूर को प्रमोट करने की दिशा में यह एक नया कदम होगा, जिसे सेव इंडियन फॉरमर्स स्पॉन्सर कर रहा है और स्थानीय स्तर पर भलु लगद/फीलगुड इस मुहिम को सहयोग दे रहा है, ‘विलेज टूर’ को प्रमोट करने के लिए ‘गवाणी’ गॉव को चुना गया है, इस विलेज टूर मे सभी प्रकार के पहाड़ी भोज के साथ यहां के सांस्क्रतिक प्रोग्राम से इन युवा पर्यटकों का मनोरंजन किया जाएगा, वहीँ पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने मीडिया को बताया कि यह अपने आप में एक अनोखा कदम है, इस विलेज टूर प्रमोशन के प्रयास से ग्राम गवाणी के लोगों को स्वरोजगार की एक बहुत बड़ी प्रेरणा मिलेगी और बेरोजगारी के कारण होने वाले पलायन को रोकने की दिशा मे भी एक सफ़ल कदम सवित होगा, इतना ही नही रोजगार को बढ़ावा देने के लिए गॉव की रौनक वापस लाने की दिशा मे यह प्रयास क्षेत्र मे एक उदाहरण बनेगा, वहीं इस कैम्प के आयोजक सुधीर सुन्दरियाल ने बताया कि यह कार्यक्रम 21 दिसम्बर से 30 दिसम्बर तक चलेगा, कैंप में सिर्फ बच्चों पर ही नहीं बल्कि शिक्षा, कृषि, महिला और किसानो पर भी काम करेगा, यहाँ आये सभी अतिथि लोग पहाड़ की सभ्यता, संस्कृति, विशेषकर पहाड़ी भोज को अच्छे से समझने का प्रयास भी करेंगे. साभार : व्यू इण्डिया टाइम्स

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