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Tag: अखंड सुहाग का प्रतिरूप – ‘करवा चौथ’!

*अखंड सुहाग का प्रतिरूप – ‘करवा चौथ’!*

  व्रतेन दीक्षामाप्नोति दीक्षयाऽऽप्नोति दक्षिणाम्। दक्षिणा श्रद्धामाप्नोति श्रद्धया सत्यमाप्यते।। अर्थ : व्रत धारण करने से मनुष्य दीक्षित होता है । दीक्षा से उसे दाक्षिण्य (दक्षता, निपुणता) प्राप्त...

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