महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर फड़णवीस की वापसी, अजित पवार बने उपमुख्यमंत्री

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प्रेट्र/मुंबई| राकांपा नेता अजित पवार के सहयोग से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर भाजपा के देवेंद्र फड़णवीस की शनिवार को वापसी हो गयी। वहीं, अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
बहरहाल, राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि भाजपा के साथ जाने का फैसला उनके भतीजे का व्यक्तिगत निर्णय है न कि पार्टी का।
राजभवन में तड़के हुए शपथ ग्रहण समारोह के बारे में लोगों को आभास भी नहीं हुआ और कुछ लोगों ने इसे ‘‘गुप्त’’ घटना बताया। फड़णवीस के 2014 में शपथ ग्रहण समारोह में वानखेड़े स्टेडियम में हजारों लोग मौजूद थे।
राज्य में राष्ट्रपति शासन हटाने के तुरंत बाद शपथ ग्रहण समारोह हुआ। महाराष्ट्र में 12 नवंबर को राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने केंद्र का शासन हटाने के लिए घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए और इस संबंध में एक गजट अधिसूचना तड़के पांच बजकर 47 मिनट पर जारी की गयी। यह शपथ ग्रहण ऐसे समय में हुआ है जब एक दिन पहले शिवसेना-राकांपा-कांग्रेस के बीच मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के नाम पर सहमति बनी थी।
शिवसेना नेता संजय राउत ने भाजपा के साथ हाथ मिलाने का फैसला लेकर अजित पवार पर शिवसेना की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। फड़णवीस की मुख्यमंत्री के तौर पर वापसी के साथ ही राज्य में महीने भर से चल रहा राजनीतिक गतिरोध खत्म हो गया।
शरद पवार ने शुक्रवार रात को ही कहा था कि नयी सरकार का नेतृत्व उद्धव ठाकरे करेंगे। तीनों पार्टियों ने नयी सरकार के गठन के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) का मसौदा भी तैयार कर लिया था।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद शरद पवार ने ट्वीट किया, ‘‘महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन देने का अजित पवार का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय है। यह राकांपा का फैसला नहीं है। हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हम इस फैसले का समर्थन नहीं करते।’’
गठबंधन में राज्य विधानसभा चुनाव लड़ने वाली भाजपा और शिवसेना ने 288 सदस्यीय सदन में क्रमश: 105 और 56 सीटें जीती थीं लेकिन शिवसेना ने भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री पद साझा करने से इनकार करने के बाद उसके साथ अपने तीन दशक पुराने संबंध खत्म कर लिए।
दूसरी ओर, चुनाव पूर्व गठबंधन करने वाली कांग्रेस और राकांपा ने क्रमश: 44 और 54 सीटें जीती। भावुक दिखायी दे रही राकांपा सांसद और अजीत पवार की चचेरी बहन सुप्रिया सुले ने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा कि पवार परिवार और पार्टी बंट गयी है।
महाराष्ट्र में हैरत में डालने वाला यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में शरद पवार की पार्टी की तारीफ की थी वो भी ऐसे समय में जब राकांपा महाराष्ट्र में गैर भाजपा गठबंधन बनाने के प्रयासों में जुटी थी।
दिल्ली में मोदी के साथ पवार की हाल की बैठक से भी महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारे में अटकलों का दौर चल पड़ा था। इस बात के भी कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा और राकांपा को एक साथ लाने में एक बड़े उद्योगपति की भी भूमिका है।
जब पवार से हाल ही में सरकार गठन में एक कोरपोरेट घराने की कथित संलिप्तता के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा कि उन्होंने नेताओं के अलावा किसी के साथ भी इस मुद्दे पर चर्चा नहीं की थी।
मोदी ने हमेशा पवार की तारीफ की और वह राज्य विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान भी उनके खिलाफ तीखा हमला करने से बचे। मोदी ने हाल ही में पवार की तारीफ तब की थी जब वह राज्यसभा के 250वें सत्र में बोल रहे थे। मोदी ने कहा कि भाजपा समेत अन्य दलों को राकांपा और बीजू जनता दल से सीखना चाहिए कि संसदीय नियमों का कैसे पालन किया जाता है।
साल 2016 में जब पवार के निमंत्रण पर मोदी मंजरी में वसंतदादा शुगर इंस्टीट्यूट आए थे तो उन्होंने राकांपा अध्यक्ष की सार्वजनिक जीवन में अन्यों के लिए उदाहरण के तौर पर प्रशंसा की थी।
मोदी ने तब कहा था, ‘‘मैं निजी तौर पर पवार का सम्मान करता हूं। मैं उस समय गुजरात का मुख्यमंत्री था। उन्होंने मेरी उंगली पकड़कर मुझे चलने में मदद की। मैं सार्वजनिक रूप से यह कहकर गर्व महसूस करता हूं।’’

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