मानव उत्थान सेवा समिति ने मातृ दिवस पर रक्त दान, वस्त्र, पौष्टिक आहार का वितरण किया

0
883

हिम बहादुर/सिलीगुड़ी। मानव धर्म के प्रणेता श्री सतपालजी महाराज के परम पूज्य माता श्री राजराजेश्वरी देवी  की पावन जन्म जयंती मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधन मे  देश विदेशो  मे  छ: अप्रैल को धूमधाम से मनाया गया । देश के विभिन्न स्थानो के साथ-साथ उत्तरपुर्वांचल क्षेत्र के सिलीगुड़ी, दार्जीलिंग, सिक्किम, डुवार्स  में मातृ दिवस पर रक्त दान, फल, वस्त्र वितरण तथा  सत्संग कार्यक्रम के साथ सम्पन्न हुआ । इस अवसर पर समिति के दार्जीलिंग शाखा के अंतर्गत संत-महात्माओं एवं प्रेमी भक्तों ने इडेन अस्पताल में रक्त दान शिविर का आयोजन किया गया तथा प्रसव वार्ड में जन्मे बच्चों को वस्त्र व बच्चे के माँ को पौष्टिक आहार वितरण किया गया।

सिलीगुड़ी के हंसबेला आश्रम में स्वर्ण जयन्ती एवं परम पूज्य जगत जननी श्री राजेश्वरी माताजी के पावन जन्मजयन्ती के उपलक्ष्य में एक दिवसीय सद्भावना सत्संग का आयोजन किया गया। परम पूज्य माता श्री राजराजेश्वरी देवी जी ने पचास वर्ष  पूर्व   सिलीगुड़ी, दार्जीलिंग , सिक्किम के दुर्गम  पहाड़ी क्षेत्रों में मानव धर्म का प्रचार शुरू किया था। उस समय आवागमन का सुविधा न होते हुये भी माता जी ने  पैदल चलकर पहाड़ एवं डुवार्स के चाय बागानों में लोगों को सत्संग सुनाकर आत्मा ज्ञान  का अलख जगाया । आज सम्पूर्ण पहाड़ एवं डुवार्स के हजारों  भक्तगण  इस आध्यात्मिक मार्ग पर चल कर अपनी जीवन मे परिवर्तन ला चुके है । सिलीगुड़ी के आस पास के क्षेत्रो सालूगाड़ा ,बागडोगरा , नक्सलबाड़ी , सुकना आदि जगहों से काफी संख्या मे  भक्तगण संतो का दर्शन एवं सत्संग के लिए पहुचे थे।

इस अवसर पर  प्रभारी महात्मा अखिलेश बाईजी ने दीप प्रज्वलित कर सत्संग  कार्यक्रम की शुरूआत की ।  उन्होने  भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि सारे संसार को संचालित करने वाली शक्ति ही हमारे स्वासों को चला रही है और उसी शक्ति को अपने हृदय में तत्व से जानना ही मानव मात्र का धर्म है ।  इसी का ज्ञान जगत जननी श्री राजेश्वरी माताजी ने लोगों को कराया और आज सद्गुरु श्री सतपालजी महाराज पूरे देश में लोगों को करा रहे हैं ।  उन्होंने कहा कि जगत जननी श्री माताजी दैवी गुणों से संपन्न एवं करुणा की सागर थीं।  श्री माताजी अपने प्रवचन में भारत के प्रत्येक नारियों को आत्मज्ञानी बनने की अपील करती थीं । श्री माताजी कहती थी कि आत्मज्ञानी मातायेँ ही प्रभु भक्त अथवा देश-भक्त सन्तान को जन्म दे सकती हैं । अगर माताऐँ ही आध्यात्मिक और संस्कारी नहीं होगी तो उनके कोख से उत्पन्न सन्तान संस्कारी और चरित्रवान कैसे हो सकता है ?

इसके बाद तहसील प्रभारी  महात्मा अंकिता बाईजी ने कहा कि भौतिक विकास के होड़ में लोग आध्यात्मिक रूप से पिछड़ते जा रहे हैं। इसलिए आज समाज में इतने सुख साधनों के बावजूद लोग अशान्त और दुखी हैं ।  सुख और आनन्द का स्रोत्र मनुष्य के हृदय में है पर उसका ज्ञान नहीं होने के कारण आज लोग उसे बहार के संसार में ढूँढ रहे हैं। महात्मा तारिका बाईजी ने कहा कि सत्संग हमारे शंकाओं का समाधान करता है एवं धर्म के रास्ते से विचलित लोगों को पुनः अध्यात्म के रास्ते पर ला देता है अतः मनुष्य को सच्चे सतगुरु के सान्निध्य में आकर आत्मज्ञान को जानना चाहिए तभी मनुष्य जीवन सफल एवं सार्थक हो सकता है ।इस  अवसर  पर  नरेन्द्र गुरूंग एवं प्रह्लाद छेत्री ने मधुर भजन प्रस्तुत कर वातावरण को संगीतमय बना दिया।

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here