मुरादनगर 22 जुलाई, 2018। समाजसेवी व उत्तराखंड़ सरकार में कैबिनेट मंत्री श्री सतपाल महाराज जी ने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति अनन्य भक्ति द्वारा होती है, अनन्य भक्ति मतलब जिसमें किसी और की भक्ति न हो। जिस प्रकार एक निशानेबाज निशाना लगाने से पहले अपने लक्ष्य पर नजर केंद्रित करके निशाना लगाता है या कैमरामैन फोटो लेते समय अपना कैमरा स्थिर रखता है ताकि फोटो साफ आये। इसी प्रकार परमात्मा की प्राप्ति के लिए मन को चारों तरफ से हटाकर अर्थात सभी चिंतनों से हटाकर परमात्मा के नाम में लगाना ही अनन्य भक्ति कहलाता है। इसी से ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है। यह उद्गार सतलोक आश्रम परिसर में श्री हंस इन्टरमीडिएट कॉलेज के मैदान में आयोजित गुरू पूजा महोत्सव के दूसरे दिन उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहे।
श्री महाराज जी ने कहा कि अपने आप को बदलने के लिए हमें अपने अन्दर छिपी हुई जो आध्यात्मिक शक्ति है, उसे प्रकट करना होगा। जब वह शक्ति प्रकट होगी, तब हम बदलेंगे, हमारा समाज बदलेगा, राष्ट्र बदलेगा और तभी हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए हम एक ऐसा भारत छोड़कर जायेंगे जो स्वर्णिम भारत होगा।
उन्होने कहा कि कायरता को प्राप्त निराश अर्जुन को भगवान ने बहुत प्रकार से समझाया पर जब अनेक प्रकार से समझाने से भी उसकी समझ में नही आया। उसका जो अज्ञान का पर्दा था, वह दूर नही हुआ, तब भगवान उसको आत्मज्ञान का बोध उसके हृदय में कराते हुए कहते है कि अर्जुन, इन भौतिक नेत्रों से तुम मेरे भौतिक स्वरूप को देख सकते हो परन्तु मेरे वास्तविक स्वरूप (आध्यात्मिक स्वरूप) को देखने के लिए मैं तुम्हें तीसरा नेत्र देता हूँ और अर्जुन को तीसरा नेत्र प्रदान किया। जब अर्जुन को ज्ञान चक्षु की, दिव्य नेत्र की प्राप्ति हुई और उसके द्वारा जब उसने भगवान के विराट स्वरूप का दर्शन किया तब वह भगवान कृष्ण की वास्तविकता को जान करके उनके आगे नतमस्तक हो गया।
कार्यक्रम में माता श्री अमृता जी, श्री विभु जी महाराज ने भी श्रद्धालुओं को संबोधित किया।
संस्था के पदाधिकारियों ने महाराज जी सहित सभी विभुतियों व अतिथियों का फूल-मालाओं से स्वागत किया। मंच संचालन महात्मा हरिसंतोषानन्द जी ने किया।

































