सद्भावना से ही राष्ट्र मजबूत होगा और विश्वगुरू बनेगा- साध्वी दर्शनी बाई जी

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मेरठ कैंट, 28 जूलाई। प्रसिद्ध समाजसेवी और आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्या कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भक्तों को समझाते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बाल-लीलाओं द्वारा भक्तों को आनन्दीत किया और जब बालक रूप में भगवान लीला करते थे तब तीनों लोकां के देवी-देवता अपने धाम से वेष बदल कर आते थे और भगवान की लीला देखकर आश्चर्य चकित हो जाते थे।
साध्वी जी ने कहा कि अध्यात्म-ज्ञान से ही मनुष्य का कल्याण सम्भव है। जब खुद का ज्ञान होगा तो आपस में एकता और सद्भावना आयेगी और राष्ट्र मजबूत होगा। आइए हम सभी लोग महापुरूषों के सपने को साकार करे और भारत को विश्व गुरू बनायें।
मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में वेस्ट एण्ड रोड, मंदिर मार्ग मेरठ कैंट में स्थित मानव धर्म मंदिर के प्रांगण में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के पाँचवें दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान श्री कृष्ण के के प्रसंग के दौरान भक्त समुदाय को बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को माध्यम बनाते हुए समस्त जीवों को समझाते है कि-सर्व धर्मान परितज्यं मामेकं शरणं ब्रज, अहं त्वं सर्व पापेभ्यों मोक्षस्यामि मा सुचः। अर्थात सभी धर्मो को छोड़ कर मेरी शरणागत हो जा, निसन्देह ही मै तुझ सभी पापों से मुक्त कर दुंगा। भगवान श्री कृष्ण और बलराम मथुरा गमन के उपरान्त आततायी कंस सहित बाकासुर, आकासुर और पूतना जैसे अनेक पापी आत्माओं का उद्धार किया।
कथा में आज के यजमान श्री नारायन सिंह चौहान धर्मपत्नि श्रीमती पुष्पा देवी ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी और सहयोगी साध्वी धनिष्ठा बाई जी, सरीता बहन व भजन गायक कलाकारों का फूल-माला, श्री राधे-कृष्ण के पट्टे और मोतियों की माला से स्वागत किया। यजमानों का स्वागत संस्था के शाखा प्रधान देवेन्द्र सिंह ने किया।
साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए भजन गायक कलाकार अमर रंगीला, सुरेन्द्र कुमार (सितारवादक), प्रकाश कुमार(तबलावादक),रवि टिकेकर और पड़ोसी देश नेपाल से पधारी हुई प्रसिद्ध भजन गायिका सरगम गायत्री ने-बड़ा नटखट है, कृष्ण कन्हैया, मेरी लागी गुरू संग प्रीत, दुनिया क्या जाने, मेरी आप की कृपा से, सब काम हो रहा है, जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव विभोर कर दिया। कथा के अन्त में कलाकारों के सुन्दर भजनों पर सबने खुब जमके नाचे।
राजेश गोयल, सोनवीर, बलवीर, श्रीराम, राकेश गोयल, सतेन्द्र सिंह, भँवर सिंह, पुष्पा शर्मा, इन्द्रेश चौहान, पारूल, सुनीता व अनेक कार्यकर्ता मौजूद थे। मंच संचालन धुरन्धर चौहान ने किया। कथा दोपहर 2 से प्रारम्भ होकर सायं 5 बजे तक चला। आरती-प्रसाद के साथ आज के कथा का विश्राम किया गया।

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