
संवाददाता/शास्त्रीनगर,मेरठ, 29मार्च| मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में गुरुद्वारा रोड में स्थित शांति पैलेस में चल रहे भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने कहा कि उस परमपिता परमात्मा के पावन नाम को जानने के लिए समय के सच्चे सद्गुरु की पहचान करके उनके द्वारा दिए गये अध्यात्म-ज्ञान को जानकर भजन-सुमिरन करें तभी हमारा कल्याण होगा| कपिल-देवहुति संवाद का भी विस्तार से वर्णन किया और अपने आधात्मिक विचारों से सबको लाभान्वित किया|
साध्वी दर्शनी बाई जी ने कहा कि इसी मनुष्य के शरीर में ही ईश्वर की प्राप्ति संभव है| चौरासी लाख योनियों में पड़कर जीव कष्ट उठाता है| भगवान ने कृपा करके यह मनुष्य का शरीर दिया है| बड़े भाग्य से मनुष्य शरीर की प्राप्ति हुई है-संत तुलसीदास ने कहा है-बड़े भाग मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा| अर्थात देव दुर्लभ मनुष्य तन पाकर उस परमात्मा के सच्चे नाम का सुमिरन-भजन करके अपना कल्याण करें| भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि यज्ञों में सबसे श्रेष्ट ज्ञान यज्ञ है जो मुक्ति प्रदान करने वाला है| भगवान की चार कृपा इस जीव के उपर होती है| भगवान की पहली कृपा चौरासी की सर्वश्रेष्ट योनी मनुष्य शरीर दिया जिसमे हम कर्म कर सकते है और भक्ति भी कर सकते है| दूसरी कृपा वेद-शास्त्रों की जो हमे सत्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते है| तीसरी कृपा सदगुरु की जो भगवान के पावन नाम का बोध कराकर हमें जन्म-मरण के चक्कर से मुक्त कर देते है| और चौथी कृपा खुद की होती है जो अपने जीवन में कर्म करके भव सागर से पार हो सकते है| कर्म तिन प्रकार के होते है-पहला कर्म जो हम नित्य प्रति करते रहते है| दूसरा शुभकर्म जो भूखे को भोजन,प्यासे को पानी और जरुरतमंदो को आवश्यक सामग्री देना और तीसरा सत्कर्म जो जीवन में भगवान के नाम को जानकर भक्ति करते है और अपना उद्धार करते है|
दिल्ली से आये हुए हंस भजन मण्डली के सुप्रसिद्ध भजन गायक कलाकारों ने अनेक सुमधुर भजनों द्वारा श्रोतागण को भावबिभोर कर दिया| कथा दोपहर 1 बजे शुरू होकर सायं 5 बजे तक चला| सबने मिलकर आरती और प्रसाद ग्रहण किया|































