सजायाफ्ता के चुनाव लड़ने पर आजीवन रोक लगे: निर्वाचन आयोग

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संवाददाता/नई दिल्ली : निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि सजायाफ्ता जनप्रतिनिधियों के चुनाव लड़ने पर आजीवन रोक लगनी चाहिए। आयोग ने कहा कि वो इस बारे में कानून में संशोधन करने के लिए सरकार को भी लिख चुकी है। तब कोर्ट ने कहा कि आप हमें बताइए कि ऐसा आपने कब लिखा। .

निर्वाचन आयोग ने कहा कि आयोग ने 1977 में जनप्रतिनिधियों की अयोग्यता की समय सीमा घटाई थी। सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें मांग की गई है कि एक साल के अंदर विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों का निपटारा हो और एक बार दोषी होने पर उन पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने मांग की है कि ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने,राजनीतिक दल का गठन करने और पदाधिकारी बनने पर रोक लगाई जाए। याचिका में ये भी मांग की गई है कि चुनाव आयोग, विधि आयोग और नेशनल कमीशन टू रिव्यू द वर्किंग ऑफ द कांस्टीट्यूशन द्वारा सुझाए गए महत्वपूर्ण चुनाव सुधारों को लागू करवाने का निर्देश केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को दिया जाए। याचिका में ये भी मांग की गई है कि विधायिका की सदस्यता के लिए न्यूनतम योग्यता और अधिकतम आयु सीमा तय की जाए।

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