
प्रसाद ने यह भी दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय कानून निर्मित करने के अधिकार क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है, जो संसद का विशेषाधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर परमाणु बम के बटन को लेकर प्रधानमंत्री पर देश विश्वास कर सकता है तो उन पर कानून मंत्री के जरिए योग्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए विश्वास क्यों नहीं किया जा सकता।
भाजपा के सांसद संजय जायसवाल ने सरकार से पूछा कि इन परिस्थितियों में संसद की सर्वोच्चता कैसे कायम रहेगी। प्रसाद ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों पर तो टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन केशवनाथ भारती बनाम केरल सरकार मामले में दिए गए फैसले के बारे में कहा कि शीर्ष अदालत ने राष्ट्र के स्तंभों के बीच शक्ति के बंटवारे की सीमा पार की। प्रसाद ने कहा, विधायिका कानून बनाएगी, कार्यपालिका उसका पालन करवाएगी और न्यायपालिका कानून की व्याख्या करेगी।
