
रक्षा मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद शायद पहली बार सेना में इस तरह की बड़ी और ‘दूरगामी प्रभाव’ वाली सुधार प्रक्रिया शुरू की जा रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या यह कवायद डोकलाम प्रकरण के बाद की जा रही है, जेटली ने कहा, ‘यह किसी घटना विशेष की वजह से नहीं है। यह डोकलाम से काफी पहले से चल रहा है।’ सुधार पहल की सिफारिश लेफ्टिनेंट जनरल डी बी शेकटकर :सेवानिवृत्त: की अध्यक्षता वाली समिति ने की थी। समिति को सेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाने और सशस्त्र बलों के रक्षा खर्च का पुनर्संतुलन स्थापित करने की शक्ति दी गई थी ताकि ‘टीथ टू टेल रेशियो’ को बढ़ाया जा सके।
‘टीथ टू टेल रेशियो’ से आशय हर लड़ाकू सैनिक :टूथ: के लिये रसद और समर्थन कर्मी :टेल: की मात्रा से है।
