एजेंसी/नई दिल्ली। देश के एक आम नागरिक को उसके काम का उपाधि सम्मान मिलता है तो स्पष्ट है कि देश बदल रहा है। इसी दौरान शनिवार को कर्नाटक से राष्ट्रपति भवन तक नंगे पैर पाहुचने के बाद राष्ट्रपति ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मान किया।
पर्यावरण की रक्षा में तत्पर, कर्नाटक की 107 वर्ष की वयोवृद्धा सालुमरदा तिम्मक्का ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से पद्मश्री सम्मान लेने के बाद राष्ट्रपति के माथे पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया। दिलचस्प बात यह है कि थिमक्का पद्म पुरस्कार लेने नंगे पैर राष्ट्रपति भवन पहुंची थीं। राष्ट्रपति ने अपने ट्विटर पर लिखा कि पद्म पुरस्कारों से राष्ट्र की सबसे श्रेष्ठ और योग्य प्रतिभाओं को सम्मानित करना राष्ट्रपति के लिए प्रसन्नता का विषय होता है। लेकिन आज जब पर्यावरण की रक्षा में तत्पर, कर्नाटक की 107 वर्ष की वयोवृद्धा सालुमरदा तिम्मक्का ने आशीर्वाद देते हुए मेरे सिर पर हाथ रखा तो मेरा हृदय भर आया।
सालुमरदा तिम्मक्का, भारतवासियों की, विशेष रूप से महिलाओं की संकल्प शक्ति, दृढ़ निश्चय और लगन की जीती-जागती तस्वीर हैं। उनके तथा पद्म सम्मानों से अलंकृत विभूतियों से प्रेरणा पाकर हमारा देश नई ऊँचाइयाँ हासिल करेगा।
थीमक्का ने तकरीबन आठ हजार से ज्यादा पेड़ लगाएं हैं। इसलिए उन्हे ‘वृक्ष माता’ की उपाधि मिली है। राष्ट्रपति भवन में उन्हे शनिवार को पद्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

