
एक तरफ कुछ विधायको में विभाग पाने की होड़ मची हुई है| वही मुख्यमंत्री अभी कुछ विभाग अन्य विधायकों में आवंटित कर सकते है| मुख्यमंत्री पद की होड़ में त्रिवेन्द्र सिंह रावत से पिछड़ने के बाद मायूस हुए सतपाल महाराज को लगातार झटके मिल रहे हैं। मंत्रिमंडल में उन्हें न तो दूसरे नम्बर का ओहदा मिल पाया और न हीं मनपसंद दफ्तर। इतना ही नहीं, बतौर मंत्री वह जिस बंगले में रहना चाहते थे उसे भी किसी दूसरे कैबिनेट मंत्री को आवंटित कर दिया गया। जाने-माने समाजसेवी और आध्यात्मिक गुरू सतपाल महाराज को उम्मीद थी कि भाजपा में उन्हें कांग्रेस से अधिक मान सम्मान मिलेगा। परन्तु अब तक ऐसा नहीं हुआ। सबसे पहले मुख्यमंत्री पद की रेस में वह पीछे कर दिये गये।
मुख्यमंत्री की होड़ में पिछड़ने के बाद महाराज को उम्मीद थी कि उन्हें कैबिनेट में नम्बर दो का दर्जा मिलेगा। बार-बार मिल रही शिकस्त पर भले ही सतपाल महाराज खुद कुछ ना बोलें पर उनके समर्थक परेशान हैं और इस बात की चर्चा चल रही है कि महाराज खुद भले ही मन, वचन और कर्म से भगवा झंड़ा उठा लिया है पर पार्टी और संगठन ने उन्हें अभी पूरी तरह से सम्मान नहीं दिया है। सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत के तुरंत बाद महाराज द्वारा पद व गोपनीयता की शपथ लेना, इस बात से ऐसा लग रहा था। परंतु जब विधानसभा भवन में कार्यालय आवंटित करने की बारी आई तो महाराज का दूसरे नम्बर का रुतबा भी छिन गया। इस तरह कद्दावार नेता सतपाल महाराज को लेकर भाजपा का अब तक का कोई भी निर्णय उनके पक्ष में नहीं गया है।
117 नम्बर वाला यह कमरा पहले तो महाराज के नाम आवंटित कर दिया गया। परंतु 24 घंटे के अंदर इस कमरे पर प्रकाश पंत ने अधिकार जमा लिया। इसका संदेश साफ है कि त्रिवेन्द्र सिंह रावत मंत्रिमंडल में दो नम्बर की हैसियत प्रकाश पंत की रहेगी। परंतु महाराज की तरह ही दो अन्य मंत्रियों मदन कौशिक और धन सिंह रावत ने भी इस मकान पर दावा ठोक दिया। ऐसी स्थिति में राज्य संपत्ति विभाग ने इस बंगले के आवंटन की फाइल को सीएम को प्रेषित कर दिया। सूत्रों का कहना है कि यहां भी सतपाल महाराज को मायूसी ही मिली है। यह बंगला मदन कौशिक के नाम आवंटित कर दिया गया है।
