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एक सोच जन्मदिन पर : अमित कुमार (Technology Head ISOLS Group Pvt. Ltd.)

 
अगर आपसे पूछा जाए की जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है । पैसा, नौकरी, छोकरी या फिर लॉटरी।  अगर सच कहूं तो इनमें से कोई नहीं। किसी के चेहरे पर आई मुस्कान को देखना और उसको महसूस कर पाना उपलब्धि है लेकिन उस मुस्कान की वजह आप है तो वह सबसे बड़ी, सच्ची और सार्थक उपलब्धि है । बहुत कम लोग हैं जो ऐसा महसूस कर पाते हैं इतनी गहराई से सोच पाते हैं। क्यों, क्योंकि लोगों के पास वक्त ही नहीं है पैसे कमाने से, नौकरी से और छोकरी से।
मेरा अनुभव कहता है कभी दूसरों के लिए जी कर देखो अच्छा लगेगा। आप हल्का महसूस करेंगे। जैसा मैं कर पा रहा हूं। अंदर से कुछ करने की इच्छा, कुछ जुनून पैदा होगा। जिसके कारण आप समाज रूपी जंजीरों को तोड़कर किसी को आजादी पर होने वाला जश्न का अनुभव करा सकते हैं।
खैर, जन्मदिन पर उपहार मिलना यह एक पुरानी रीत है,  इसमें नया क्या। आप आज की पीढ़ी के नौजवान साथी हैं इसलिए इसको बदलिए और किसी जरूरतमंद को उसकी जरूरत के हिसाब से कुछ दिला कर इस रीत का पासा पलट दीजिए। अपना दिल बड़ा रखिए और उपहार लेने की बजाए देने पर गौर दीजिए। जैसे मैंने एक छोटा सा प्रयास करके इस रीत को बदलने की ठानी। आप भी ठान लीजिए।
जैसा कि मेरे जन्मदिन के अवसर पर रात से ही शुभकामनाएं देने का सिलसिला अलग-अलग माध्यमो से आरंभ हो चुका था। दिन की शुरुआत होते ही उपहार देने की रीत भी शुरू हो चुकी थी। ऐसा होना स्वभाविक था। लेकिन मैं इस पुरानी रीत को बदलने की ठान चुका था। उसी समय मुझे एक मेहनती बच्चे का ख्याल आया जो कि मेरे ऑफिस में काफी समय से कार्यरत है। मैंने उसको अपने पास बुलाया और उसकी जरूरत के बारे में पूछा और समझा और फिर उसी समय उसको बाज़ार से एक साइकिल दिलाई। जैसा कि उसको जरूरत थी। मैंने ऐसा नहीं सोचा था कि बस इतनी सी चीज के लिए वह इतना खुश हो जाएगा। उसके चेहरे के भाव देखने लायक थे उसका चेहरा सूर्य की भांति चमक उठा था। उसके मन में उठने वाले विचार समंदर की तरह गहरे हो चले थे, वह बोल कर भी बोल नहीं पा रहा था। मानो पानी से भरे हुए घड़े की भांति उसकी आंखें भर आई थी। ऐसा प्रतीत हुआ मानो उसकी भुजाएं हाथी की भांति बलवान हो गई हो। मानो उसका शरीर किसी पर्वत की भांति विशालकाय और स्थिर हो गया हो और वह खुश ऐसा था जैसे चंद्रमा को पाकर चकोर। यह वह खुशी थी जो मुझे दूसरों के लिए कुछ करने के लिए ऊर्जावान करती है ,  मुझे जिंदा रखती है, मुझे एक आशा की किरण दिखाई देती है कि मैं जीवन में किसी के लिए कुछ कर पाया और हां यह मेरा सौभाग्य है कि भगवान ने मुझे इस काबिल बनाया कि मैं दूसरों के दर्द को समझ सकूं, उसको महसूस कर सकूं और जहां तक हो सके उसका हल निकाल सकूं। आप भी काबिल है आज से ऐसा मान लीजिए। और शुरुआत कीजिए।
मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आसपास के जरूरतमंद बच्चों के लिए बुजुर्गों के लिए कुछ कीजिए। अपने लिए सब करते हैं दूसरों के लिए कुछ कर के देखिए खुशी मिलती है जो मैं शब्दों के द्वारा आपको बयां नहीं कर सकता हूं।  चित्र में आप देख सकते हैं इस बच्चे की मुस्कान, दिल से निकली हुई मुस्कान है, वह कोई सुबह सुबह पार्क में लगने वाला दिखावटी ठहाकों की भांति नहीं है।
मैंने अपने जन्मदिन के अवसर पर उपहार लेने की बजाय उपहार देना उचित समझा। आप पार्टी करते वक्त जो पैसा बहाते हैं उसको बचाएं और जरूरतमंदों को जरूरत की चीज दिलाकर आपके होने का एहसास दिलाएं। आप भी कुछ दीजिए और खुशी का अनुभव कीजिए । जैसा मैं कर रहा हूं।