प्रदीप चौहान/दिल्ली: हिंसा प्रभावित पूर्वोत्तर दिल्ली में परामर्श, भोजन और शिक्षा देने के लिए दीपालय ने प्रोजेक्ट उमंग की शुरुआत मुस्तफाबाद में ईदगाह चौक राहत शिविर में शैक्षिक खेलों, बौधिक व कलात्मक कार्यकलापों और संगीत से की।
पिछले 40 वर्षों से लोगों को आत्मनिर्भर बनाने और सभी के लिए न्यायसंगत समाज बनाने के मुख्य उद्देश्य के साथ काम कर रहे इस संस्था को जब दिल्ली दंगा पीड़ितों की दुर्दशा के बारे में पता चला, तो न केवल बच्चों को शिक्षित करने, बल्कि उन्हें दंगों के आघात से बाहर लाने, उन्हें खुशी देने और मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक परियोजना शुरू करने का फैसला किया। संस्था द्वारा गठित टीम ने स्थिति का आकलन करने के लिए एक शिविर से दूसरे शिविर का दौरा किया। एक या दो दिन में ही परियोजना उमंग की संकल्पना की गई।
दीपालय यह मानती है कि जो बच्चे दंगों से कम या ज्यादा प्रभावित थे उनकी मदद के लिए बहुत प्रयास और समय लगेगा। उनके माता–पिता दवाओं, कपड़े, भोजन और सुरक्षित वातावरण के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अधिकांश लोग अपने घर और सामान खो चुके हैं। वे टेंट शिविरों में रह रहे हैं। संस्था की टीम सड़कों और घरों में दुबारा हँसता खेलता जीवन वापस लाना चाहती है जिन्हें स्पष्ट कारणों से छोड़ दिया गया है।
संस्था के सेक्रेटरी व चीफ़ एक्ज़ीक्यूटिव श्री ए जे फ़िलिप ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि “उमंग का अर्थ है खुशी। यह एक परियोजना का नाम है जिसे हम आज हिंसा प्रभावित पूर्वोत्तर दिल्ली में शुरू कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य वहां एक केंद्र शुरू करना है, जहां इस दर्दनाक घटना पीड़ित बच्चों को परामर्श, भोजन और शिक्षा दी जाएगी।
यह सभी धर्मों और जातियों के बच्चों के लिए खुला होगा। यह एक राहत परियोजना नहीं है। हम कुछ वर्षों के लिए वहाँ रहने की योजना बनाते हैं। प्रारंभ में, हमारे प्रशिक्षित परामर्शदाता जरूरतमंद महिलाओं को भी परामर्श देंगे।
साथ ही साथ उन्होंने इस महान कार्य की सफलता के लिए अपने दोस्तों, संरक्षकों और शुभचिंतकों के समर्थन व सहयोग का आग्रह करते हुए कहा कि “हमारे प्रयासों को सफल बनाने के लिए हमें आपके समर्थन की आवश्यकता है। इस ड्रीम प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए हमें स्वयंसेवकों और संसाधनों की आवश्यकता है।”
दीपालय की एक्सिक्यूटिव डायरेक्टर मिस जसवंत कौर ने लोगों से आग्रह करते हुए कहा कि “मुझे दीपालय के साथ अपने जुड़ाव पर वास्तव में गर्व है। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के कारण प्रभावित हुए लोगों के जीवन में उमंग लाने के लिए कृपया इस कारण का समर्थन करें।”
दीपालय की ओर से काम कर रही मिस अन्तरा मुख़र्जी के अनुसार यह शिविर उन बच्चों से भरा है जो कुछ बौद्धिक, कलात्मक और मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेपों से लाभान्वित होंगे। हम ऐसे स्वयंसेवकों की तलाश कर रहे हैं जो बच्चों के साथ काम कर सकें, शैक्षिक खेल खेल सकें, कला व संगीत के ज़रिए विभिन्न कार्यकलाप कर सकें, परामर्श और कहानी कह सकें।
संस्था में काम कर रहे रवि पहुजा जो दीपालय के एलुमनाई भी रहे हैं, ने बहुत गौरवान्वित होकर कहा कि “लोग पूछते हैं मैं दीपालय में क्यों काम करता हूँ।
मैं उन लोगों को कहता हूँ, क्योंकि दीपालय ही ऐसी संस्थान है जो जमीनी सतह पर लोगों से जुड़ कर काम करती है।”
इंडिया इज अस वेबसाइट ने इस मुहीम में अपना योगदान देते हुए अपने फेसबुक पेज के जरिये दीपालय के इस महान पहल की सराहना करते हुए कहा “आइए परिवर्तन निर्माता बनें और स्वर्ण / रजत / कांस्य प्रमाणन जीतें। समय या नकद दान करके खुशी का आनंद लें।
विभिन्न हेजटैग के साथ सोशल मीडिया पर लाइक, कमेंट्स और शेयर कर लोग इस मुहिम को बहुत पसंद कर रहे हैं और अपना सहयोग भी दे रहे हैं।

