
8, 9 जनवरी की हड़ताल मज़दूरों की लम्बे समय से उठाई जा रही मांगों के लिए की जा रही है। इनमें शामिल हैं ठेकेदारी ख़त्म करनेए समान काम का समान वेतन और सुविधा देने, न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए देने, बोनस.ईपीएफ पर सीलिंग को ख़त्म करने, ग्रेज्युटी की मात्रा बढ़ाने, सभी को पेंशन देने, 45 दिन के अंदर ट्रेड यूनियन को पंजीकृत करने, श्रम कानूनों में मज़दूर.विरोधी बदलावों को बंद करने, निजीकरण कार्यक्रम को रोकने और वापस लेने, आदि की मांगें।
धुरन्धर टाइम्स के संवाददाता को कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी के प्रवक्ता बिरजू नायक ने बताया कि इस हड़ताल में देश की अर्थव्यवस्था के अलग.अलग क्षेत्रों के मज़दूर जैसे सभी सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों, उद्योगों, सेवाओं और कृषि क्षेत्रके श्रमिक, केंद्र व राज्य सरकार के कर्मचारियों व शिक्षकों, डाक, रक्षा, रेलवे, बीमा, बैंक और टेलिकॉम कर्मचारिय, तेल, कोयला और बिजली क्षेत्रों, मेडिकल और सेल्स प्रतिनिधि, परिवहन, घरेलू कामगार मज़दूर, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के मज़दूरों और स्कीम कर्मियों आदि इस हड़ताल में शामिल हो रहे है।
क्योंकि देश के उद्योगपतियों के हितों की रक्षा के लिए केन्द्रीय सरकार मज़दूर.विरोधी, किसान.विरोधी और राष्ट्र.विरोधी निजीकरणए उदारीकरण और भूमंडलीकरण के कार्यक्रम को शक्ति से लागू कर रही है। जिसका सख़्त विरोध प्रकट करने के लिए मेहनतकशों के देशभर के संगठनों ने इस हड़ताल का आह्वान किया है।
उन्होंने आगे बताया कि यहआॅल इडिया हड़ताल श्रमिकों के रोजी.रोटी और अधिकारों पर बढ़ते हमलों को रोकने के लिए श्रमिकों के एकजुट और संगठित होने के संकल्प काए एक शानदार प्रदर्शन बनेंगा।
