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एक ख्वाब : कैलाश मंडल

Poetry by Kailash Mandal

एक ख्वाब देखा,

जिसे पूरा करना है|

एक सपना है

जिसे अधूरा नहीं छोड़ना है |

रुकावटें तो क‌ई आऐ‌ंंगी और जाएंगी

पर झुकना नहीं है|

एक सपना है

जिसे पूरा करना है|

एक ख्वाब देखा

जिसे पूरा करना है|

कहने वाले खुब कहेंगे,

पर सूनना नहीं है|

चाहे जितनी भी बार गिरे ,

खड़े होकर लक्ष्य को पाना है

साथ में खड़े हैं अपने,

जितनी भी बार गिरे हैं|

मेहनत कर

उस ख्वाब को पूरा करना है|

एक ख्वाब देखा

जिसे पूरा करना है |