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व्हीलस्ट्रीट रेंटल बाइक उत्तराखण्ड में शुरु

संवाददाता/देहरादून : भारत के सबसे बड़े बाईक रेंटिंग प्लेटफाॅर्म, व्हील स्ट्रीट ने उत्तराखण्ड में अपने विस्तार अभियान की घोषणा की है। ऋषिकेश और नैनिताल में यह कंपनी बाइक रेंटिंग का कार्य कर रही है। छोटे और मध्यम शहरों में अपने आक्रामक विस्तार अभियान की घोषणा की है। इस अभियान में वेंडर्स के लिए कई फायदे शामिल हैं। इन वेंडर्स में व्यक्ति और कंपनियां शामिल हैं, जो व्हीलस्ट्रीट के प्लेटफाॅर्म पर बाईक रेंटल का बिज़नेस प्रारंभ करना चाहते हैं। कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही विकास की अपार संभावनाएं 200 से अधिक वेंडर्स के लिए काफी आकर्षक हैं, जो पहले ही एम्पैनल किए जा चुके हैं।

व्हीलस्ट्रीट ने भारत के 30 शहरों में अपना बिज़नेस स्थापित कर लिया है और इसके पास प्रतिमाह ‘10,000’ ग्राहकों का सक्रिय आधार है। इस समय व्हीलस्ट्रीट पर सूचीबद्ध बाईक्स की संख्या 2000 से है, जिसमें से 400 से अधिक बाईक प्रतिदिन रेंट पर दी जाती हैं। आज दुनिया में परंपरागत बिजनेस/कंपनियां अपने डिजिटल परिवर्तन के लिए टेक्नाॅलाॅजी अपग्रेड की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में व्हीलस्ट्रीट की सफलता का मंत्र ग्राहक और वेंडर फेसिंग एप्प है, जो सबसे सुविधाजनक तरीके से बाईक्स की बुकिंग/ट्रैकिंग संभव बनाता है। 80,000 रु. से 1 लाख रु. तक के बिज़नेस के साथ वेंडर्स देश में व्हीलस्ट्रीट द्वारा प्रदान किए गए बिज़नेस के अवसरों से काफी प्रसन्न हैं। व्हीलस्ट्रीट की दूसरी एक्सक्लुसिव विशेषता यह है, कि वो वेंडर्स को क्षेत्र में अपने बिज़नेस में सुधार करने के लिए परामर्श भी प्रदान करते हैं, जो क्लाईंट-वेंडर के संबंधों में व्यक्तिगत सद्भाव भी जोड़ता है। हाल ही में व्हीलस्ट्रीट ने अपना ‘ट्रैवल एण्ड टूर्स’ वर्टिकल लाॅन्च किया है, जिसने यात्रियों को कस्टम-मेड इटीनरेरी के साथ वेंडर्स को बिज़नेस के अधिक अवसर प्रदान किए हैं। मोक्ष श्रीवास्तव, को-फाउंडर एवं सीएमओ, व्हीलस्ट्रीट ने कहा, ‘‘पिछले कुछ सालों में भारत के टू-व्हीलर बाजार ने निरंतर बढ़ोत्तरी देखी है। सोसायटी आॅफ इंडियन आॅटोमोबाईल मैनुफैक्चरर्स (एसआईएएम) के अनुसार, साल 2016-17 में भारत में टू-व्हीलर्स की 17 मिलियन से अधिक यूनिटें बिकीं, जिसके चलते यह दुनिया का सबसे बड़ा टू-व्हीलर बाजार बन गया। इसलिए यहां पर बाईक रेंटिंग प्लेटफाॅर्म के लिए विशाल अवसर हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था में टेक्नाॅलाॅजी ने मेट्रो शहरों का स्वरूप बदल दिया है, लेकिन मध्यम शहर भी तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं। ‘शेयरिंग इकाॅनाॅमी’, जिसमें 30 बिलियन अमेरिकी डाॅलर की क्षमता है, का हिस्सा बनकर, व्हीलस्ट्रीट का लक्ष्य वेंडर्स को एंड यूज़र्स के साथ सुगम विनिमय का एक मंच प्रदान करता है, ताकि टेक्नाॅलाॅजी की मदद से बाजार की संभावनाओं का लाभ उठाया जा सके।’’