गुरु पुर्णिमा
हिम बहादुर/रम्फू,सिक्किम : भारत देश साधु तथा ऋषि-मुनियों का देश है, यह देश गुरु शिष्य परम्परा का देश है। यह संस्कृति-संस्कारों का पालन करने वाला देश है। गुरु शिष्यों का नाता अनादि काल से चला आ रहा है। गुरु का महिमा इन जिभ्या से बखान नही किया जा सकता है। सम्पूर्ण पृथ्वी को कागज बनाया जाए, सभी वृक्षो को कलम बनाया जाए, समुन्द्रों को स्याही बनाया जाएं फिर भी गुरु महिमा नही लिखा जा सकता। यह बातें मानव उत्थान सेवा समिति के श्री सुयश सत्संग धाम मंदिर रंगपो, पूर्व सिक्किम रम्फू तहसील द्वारा आयोजित गुरु पूजा एवं ब्यास पूजा के अवसर पर संबोधन करते हुए तहसील प्रभारी साध्वी पूर्ण बाई जी ने कही।
उन्होंने आगे अपने प्रवचन में कहा कि अपने आत्मिक शक्ति को पहचानने से अमृत प्राप्त होता है। यदि इसी मन को पहचानते नही तो विष है, इसी के अंदर ही देवता और राक्षस बिराजमान है। इसके बाद महात्मा कृतिका बाई जी, महात्मा बिंदु बाईजी(स्वेत) सिक्किम राज्य समिति केंद्रीय सलाहकार नगेन्द्र शर्मा ने भी संबोधन के कहा कि ब्राह्मण जाति से नही आत्मा ज्ञान से ब्राह्मण होता है जिसे ब्रह्मज्ञानी कहा जाता है। गीता का अर्थ ही ज्ञान है। आज केवल तोता रटाई में सीमित है वास्तविकता को हम ढूंढना नही चाहते है। यही मानव की कमजोरी है। बाहर का खजाना खोजना तथा जोड़ने में व्यस्त है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विधिपूर्वक पूजन सहित दिप प्रज्वलन से की गई। इस अवसर पर सूर्य कुमार गिरी ने स्वागत भाषण तथा धन्यवाद ज्ञापन गंगा सिंचुरी ने रखा। कार्यक्रम का संचालन श्रीमति कविता परियार ने की। इसकी जानकारी सागर मोहोरा ने दी।

