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ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का जीवन में नितांत आवश्यकता-साध्वी दर्शनी बाई

कोटपुतली,जयपुर(राजस्थान)24 अक्टूबर। देश की जानी-मानी संस्था मानव उत्थान सेवा समिति की शाखा श्री हंस सत्संग भवन द्वारा आयोजित श्री राम मंदिर, श्री दीपचन्द जी की बगीची, लक्ष्मीनगर के प्रांगण में संगीतमय सात दिवसीय श्रीमद्भागवत आत्म-कथा महायज्ञ के पहले दिन सुप्रसिद्व समाज सेवी व आध्यात्मिक गुरू श्री सतपाल जी महाराज की परम शिष्या कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने कथा का महत्व पर बहुत ही सरलता पूर्वक प्रकाश डाला। ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब भक्त के जीवन में भगवान के नाम का बोध होता है तब भक्ति प्रारम्भ होती है और जीवन में वैराग्य आता है। राजा परिक्षित को जब उनसे गलती हुई तब श्रृंगी ऋषि ने श्राप दे दिया और श्री सुकदेव मुनि ने यही कथा सुनाया था। यह बहुत सुनहरा अवसर हमें भी भगवान ने दिया है। उस परमपिता परमात्मा के सच्चे नाम को जान कर भजन-साधना करके अपना कल्याण करे और मनुष्य चोले को सार्थक बनाये। साध्वी जी ने सभी भक्तों को अध्यात्म के पथगामी होने का संदेश दिया और ज्ञान, भक्ति और वैराग्य का जीवन में नितांत आवश्यकता पर जोर देते हुए भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति रस में सबको सराबोर कर दिया।
प्रातः 8 बजे से कलश यंात्रा बबेरवाल शिवालय से प्रारम्भ होकर लक्ष्मीनगर व आस-पास के सभी क्षेत्रों में बैण्ड बाजे के साथ बड़े धूमधाम से निकाली गयी। लगभग 500 से अधिक भक्तों ने यात्रा में सम्मिलित होकर यात्रा का लाभ उठाया। यात्रा का शुभारम्भ श्री भीखाराम जी (वार्ड मेम्बर) ने हरी झण्डी दिखाकर किया। कथा के दौरान आज के यजमान श्री जगदीश सैनी धर्मपत्नी श्रीमती सावित्री देवी, श्री हीरालाल सैनी धर्मपत्नी विधा देवी और दिलकौर देवी ने कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी, सहयोगी साध्वी प्रज्ञा बाई जी, साध्वी इन्द्रावती बाई जी और विभिन्न स्थानों से पधारें हुए अनेक भजन गायक कलाकारों का फूल-माला और राधे-कृष्ण के पट्टे से स्वागत किया।
साथ ही दिल्ली व अनेक स्थानों से पधारें हुए धुरन्धर चैहान, अमर रंगीला व भजन गायिका सरगम गायत्री ने गुरू चरण कमल बलिहारी रे, जीवन है बेकार, भजन बिन दुनिया में, मिलती है राम-नाम की दौलत कभी-कभी, कैसे चुकाउँ इन साँसो की मोल रे, जन्म देने वाले इतना तो बोल रे और जागो ऐ दुनिया वालो सतगुरू जगा रहे है, जैसे सुमधुर भजनों द्वारा सबको भाव-विभोर कर दिया।
कथा में लक्ष्मन जी, घनश्या मजी, रामकुमार, शम्भू दयाल, रामजी लाल, सीताराम, सुणाराम, रामप्रताप, देवनारायण, प्रहलाद, ललिता देवी, मीना देवी, सुलोचना देवी, संतोष देवी, उर्मिला देवी, कौशल्या देवी आदि उपस्थित रहे। यह कथा दिनाॅक 24 से 30 अक्टूबर तक प्रतिदिन दोपहर 2 से 5 बजे तक चलेगा।