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श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह बड़े धूमधाम से मनायी गयी

संवाददाता/शास्त्रीनगर,मेरठ, 01अप्रैल| सुप्रसिद्ध समाजसेवी श्री सतपाल जी महाराज की प्रेरणा से शांति पैलेस में चल रहे भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास साध्वी दर्शनी बाई जी ने भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी का विवाह बड़े धूम धाम से मनायी गयो| भक्त और भगवान के बिच का अनुपम दृश्य और अटूट रिश्ता आज देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ| जीव अल्पज्ञ होता है और ब्रह्म सर्वज्ञ| जीव जब भी परमपिता परमात्मा के पावन नाम को भूल जाता है तब भगवान ही स्वयं सतगुरु रूप में मानव का शरीर धारण करके आते है और भटके हुए मानव को अध्यात्म ज्ञान देकर उसे सत्य के मार्ग पर लगाते है| जिसपर चलकर मानव अपना कल्याण करता है|

मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में चल रहे कथा के दौरान उद्धव-गोपी संवाद का वर्णन करते हुए साध्वी दर्शनी बाई जी ने कहा कि जब श्रीकृष्ण से अलग होते ही सभी गोप-गोपियों के शरीर अपने भगवान की याद में सूखने लगे तब श्रीकृष्ण ने उद्धव जी गोकुल में गोपियों को समझाने के लिए भेजते है लेकिन सबकुछ उल्टा हो गया| जब उद्धव जी को श्रीकृष्ण भक्ति का अभिमान हो गया था  तब भगवान ने उनके अभिमान का मर्दन करने के लिए गोपियों के  समक्ष भेजा और गोपियों के अगाध प्रेम को देखा तो उनके होश उड़ गये थे| चले थे उपदेश देने लेकिन उल्टा गोपियों ने उपदेश देकर तुरत वहा से वापस लौटा दिए| गोप- गोपिकाओ का श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम अपने आप में एक अनूठा मिशाल है|

साध्वी जी ने कहा कि जो भी नित्य प्रति एकाग्र मन से सत्संग श्रवण करता है उसको बहुत जल्दी भगवान की प्राप्ति होती है| क्योकि भगवान की प्राप्ति पहला स्थान सत्संग होता है| भगवान कहते है कि- “संत मिले तो मै मिल जाऊ, संत ना मुझसे न्यारे” अर्थात संत सत्संग में मिलते है और सच्चे संत ही भगवान प्राप्ति का उपाय बताते है| सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि दुनिया में भक्त सुदामा और श्रीकृष्ण के मित्रता का कोई तोड़ नहीं है| सच्ची मित्रता का सबसे बड़ा मिशाल है|

आज के मुख्य अतिथि मा. राजेन्द्र अग्रवाल जी (सांसद) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि श्री सतपाल जी महाराज अपने आधात्मिक ज्ञान देकर हजारों-हजारों लोगों को सत्य के मार्ग पर चलाकर भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए बहुत बड़ा कार्य कर रहे है| महाराज जी दिन-रात परिश्रम कर रहे है| सद्भावना सम्मेलन के माध्यम से भारत को विश्वगुरु बनाने को संकल्पित है| सांसद ने कथा व्यास साध्वी जी का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया| संस्था के वरिष्ठ कार्यकर्ताओ ने भी मुख्य अतिथि माननीय सांसद जी का आधात्मिक पुस्तक और फूलमाला पहनाकर स्वागत किया|

कथा के दौरान दिल्ली से आये हुए हंस भजन मण्डली के सुप्रसिद्ध भजन गायक कलाकारों ने- विवाह के बहुत अधिक बधाईयां गाये, श्याम पिया मोरी रंग दे चुनरिया, श्री सतपाल जी का ये व्रत है, रामराज्य अविराम हो, हर कन्या एक सीता हो, हर बच्चा एक राम हो” जैसे अनेक सुमधुर भजनों द्वारा श्रोतागण को भावबिभोर कर दिया| अनेक कलाकारों द्वारा मनमोहक झांकियां भी निकाली गयी| भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मिणी के विवाह का मंडप भी अत्यंत मनोरम लग रहा था| कथा दोपहर 1 बजे शुरू होकर सायं 5 बजे तक चला| सबने आरती और प्रसाद ग्रहण किया|