
शिवसेना सांसद और पार्टी के मुखपत्र सामना के कार्यकारी संपादक संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बातचीत की| इसमें उन्होंने कहा, ‘हेडगेवार (आरएसएस के पहले प्रमुख) और गोलवलकर (गुरूजी, आरएसएस के दूसरे प्रमुख) के बाद भागवत ही हैं, जो अखंड हिंदू राष्ट्र के निर्माण के लिए जी-जान से मेहनत कर रहे हैं| राष्ट्रपति पद के लिए वे एक बेहतर विकल्प हो सकते हैं.’ हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में किसे समर्थन देना है, किसे नहीं, इस पर अंतिम फैसला शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ही लेंगे|
वैसे शिवसेना के इस बयान के राजनीतिक मतलब भी निकाले जा रहे हैं| जानकारों की मानें तो महाराष्ट्र के नगर निकायों और बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव में भाजपा के शानदार प्रदर्शन से शिवसेना बेहद चिंतित है| उसे महाराष्ट्र में अपना जनाधार खिसकता दिख रहा है| यही वजह है कि वह भाजपा और उसके सबसे लोकप्रिय नेता- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राजनीतिक दुविधा की स्थिति में फंसाना चाहती है| इसके लिए बहाना राष्ट्रपति चुनाव है तथा मु्द्दा, हिंदु राष्ट्र और हिंदुत्व का|
यह आकलन इसलिए भी सही लगता है क्योंकि अब तक शिवसेना ने राष्ट्रपति चुनाव में किसी उम्मीदवार के समर्थन को लेकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं| बताया जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर विचार के लिए एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) के सभी घटक दलों को 29 मार्च को अपने आवास पर खाने पर बुलाया है| भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद उद्धव ठाकरे को इस अायोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है| लेकिन उनकी ओर से अभी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है.
इसके उलट जब राउत से उद्धव के दिल्ली जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘अगर शिवसेना के वोटों की जरुरत है, तो बातचीत के लिए मातोश्री (मुंबई में उद्धव का निवास) आना होगा.’ राउत ने यह भी कहा, ‘पिछले दो राष्ट्रपति चुनाव में हमारी योग्यता को कम आंका गया| इसीलिए शिवसेना ने दोनों बार एनडीए उम्मीदवार का समर्थन नहीं किया था’ |
साभार : सत्याग्रह
