संवाददाता/बिहार खुर्द, 1अक्टूबर।
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
अर्थात “जो देवी सर्वभूतों, सभी जीवों में, सभी प्राणियों में शक्ति रूप से स्थित है, उन देवी को नमस्कार है, उन देवी को नमस्कार है, उन देवी को नमस्कार है।”
भुखल चौहान ने अपने निजी प्रोजेक्टर के माध्यम से पुरे नवरात्रे में माता रानी के अनेक सीरियल और चलचित्र द्वारा भक्तों को लाभान्वित किया। गांव के भजन गायक कलाकार ब्यास खरवार के भजन मंडली टीम द्वारा प्रतिदिन सायं कालीन भजन-कीर्तन द्वारा पुरा गांव भक्तिमय कर दिया। गांव के सभी भक्तों ने नवरात्रि पर्व को बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया।
आईये बताते है कन्या पूजन का क्या है रहस्य-
नवरात्रि के अष्टमी के दिन कन्या पूजन एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें 2 से 10 वर्ष की आयु की कन्याओं की पूजा की जाती है। इस पूजा में कन्याओं को देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों का प्रतीक माना जाता है।
कन्या पूजन का महत्व
कन्या पूजन का महत्व इस प्रकार है:
– आशीर्वाद: कन्याओं की पूजा करके, भक्त देवी का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
– सौभाग्य और समृद्धि: कन्या पूजन से घर में सौभाग्य और समृद्धि की वृद्धि होती है।
कन्या पूजन की विधि
कन्या पूजन की विधि इस प्रकार है:
– पूजा की तैयारी: कन्याओं को बैठने के लिए आसन और पूजा की सामग्री तैयार की जाती है।
– पूजा: कन्याओं के पैर धोकर, उन्हें आसन पर बिठाकर, उनकी पूजा की जाती है।
– भोजन: कन्याओं को भोजन कराया जाता है, जिसमें विशेष रूप से तैयार किए गए व्यंजन शामिल होते हैं।
– दक्षिणा और भेंट: कन्याओं को दक्षिणा और भेंट दी जाती है, जैसे कि कपड़े, खिलौने आदि।
कन्या पूजन एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जो नवरात्रि के दौरान किया जाता है। यह पूजा देवी की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने का एक तरीका है।

