क्षण बीते पल बिते-बिते दिनों-दिन,
बारह महीने बिते ज्यों-ज्यों|
आया नव वर्ष का शुभ दिन,
बधाईयों की झंकार से विश्व प्रफुल्लित||
उन्नीस-बीस का अन्तर कहीं पर रहा,
कहीं-कहीं पर हो रहे है पो बारह|
नौ दो ग्यारह हो गये पाकिस्तानी,
भारतीय सेना का हो रहा जयकारा||
अतीत काल का तांडव इतिहास रहा,
बयालिस जवानों को धोखे से मारा|
सनसनी फैली चहूँ दिशी छाई कालिमा,
क्रांति के शस्त्र ने शत्रु को घुस कर मारा||
अतीत भारत की गौरव गाथा गाता,
मंगल ग्रह पर भी अपना परचम फहराता|
भारत योग से विश्व में अपनी पहचान पाता,
बीता हुआ कल भविष्य की राह दिखाता||
नए वर्ष का सब करे सम्मान,
सद्भावना का दीप जलाए घर-घर||
आंतक का तिमिर मिटे,सत्य का प्रकाश,
सत्य,अहिंसा शांति का साम्राज्य हो||
सद्गुरु के चरणों में शीश झुकाए,
सब मिल-जुल भारत को विश्व गुरु बनाए।
लेखिका-सुशीला रोहिला

