हिम बहादुर/धुलाबारी(नेपाल): नेपाल भारत का पड़ोसी राष्ट्र है। हमे आपस मे सदभावना होनी चाहिए। पड़ोसी वो होता है जो संकट में काम आए। दोनों देश आपस मे प्रेम सदभाव होगा तो हम आगे बढ़ सकते है। सब सुखी हो सबका कल्याण होना चाहिए। किसी व्यक्ति विशेष जातीयता का नही। नेपाल शांति का देश रहा है। महात्मा बुद्ध ने अहिंसा परमो धर्म का प्रचार किया।यह जानकी माता का देश है। मानव धर्म के प्रणेता सतपाल जी महाराज से यह अपने प्रवचन में कहा। आगे उन्होंने अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए अपने अमृतमत प्रवचन में कहा कि मानव-मानव के बीच में सदभावना हो, सदभावना होगी दुनिया में शांति होगी विश्व का कल्याण होगा।नेपाल देश, धर्म तथा ज्ञान का देश रहा है। ज्ञान की यहाँ पूजा होती। प्रयागराज में कुंभ मनाया गया । गंगा जमुना के धारा के साथ सरस्वती भी बह रही है। सरस्वती की धारा दिखती नही है वह अदृश्य है वह ज्ञान की धारा है। रामचरितमानस में तुलसीदास जी कहते है मुद मंगलमय संत समाजु, जो जग जंगम तीरथ राजू, राम भक्ति जहा सुरसरि धारा, जाको ब्रह्मा विचार प्रचारा। जहा जहा संत पहुचते है वहा तीरथ बन जाता है। आज धुलाबारी के नन्दा नदी के किनारे भागवत चर्चा सुन रहे है यही तीरथ बन गया है। सदभावना की चर्चा सुन रहे है।विश्व कल्याण और अपने कल्याण की बात सुन रहे है। एक चिड़िया ने मधुमखी से पूछा कि यह मनुष्य तुम्हारे शहद को चुरा कर ले जाते है। मधुमक्खी ने सुन्दर जवाब दिया कि मनुष्य मेरे शहद को चुरा कर तो ले जा सकता है पर शहद बनाने की कला है वो नही चुरा सकता। मधुमक्खी शहद कैसी बनाती है यह ज्ञान हमारे पास नही है। अगर मानव शहद बना पाता तो आज मैन्युफैक्चरिंग शुरू हो जाता। शहद बनाने की कला मनुष्य के पास नही है। भगवान राम जब भीलनी के कुटिया में आते है भीलनी नीच जाती की थी। वह आश्रम में सेवा करती थी। मतंग ऋषि भीलनी के सेवा से काफी खुश थे। उन्होंने आशीर्वाद दिया कि तुझे प्रभु राम का दर्शन मिले। भगवान राम ने सबरी को दर्शन दिए। सबरी का तपस्या सफल हुआ। सबरी के पास वह ज्ञान था जो भगवान राम को पहचाना।भगवान राम सबरी के सेवा से प्रसन्न होकर सबरी के जूठे बेर खाते है। हम लोग भगवान का प्रसाद लेते है और भगवान सबरी का प्रसाद खाते है। भगवान राम ने सबरी से कहा कि सबरी तुम नीच जाती की हो मुझे जाट-पात से कोई लेना देना नही है। जाट-पात पूछे न कोई, हरि को भजे सो हरि का होय।
इसलिए कहा गया है प्रथम भक्ति संतन कर संगा। संतो के संगत से पहला भक्ति शुरू होता है। लेकिन आज लोगो के पास सत्संग के लिए टाइम नही है। जब आदमी को अटैक पड़ता है तब उसके पास टाइम मिल जाता है। दूध के अंदर माखन रमा हुआ है उसे बिना विधि के हम प्राप्त नही कर सकते। उसी तरह भगवान सर्वव्यापक है।चाहे कोई भगवान को माने या न माने स्वास हर कोई व्यक्ति ले रहा है और छोड़ रहा है। इसलिए कहा गया है कि निरंजन माला घट में फिरे दिन-रात, ऊपर आवत नीचे जावत स्वास स्वास चल जात और संसारी नर समझे नाही विरथा उमर विहाट। यह दिन रात निरंतर चलती ही उसे से हम सुमिरण कर सकते है। नेपाल में लोग सनातन धर्म को मानने वाले में है। जिसका आदि अंत नही है। शक्ति का जन्म नही होता और न ही नाश होता है।आत्मा अजर अमर और अविनाशी है।इसका कोई अस्त्र शस्त्र से नाश नही होता है।उसी को हमे जानना है। लोग कहते है कि आत्मा को नही जान सकते अगर ऐसा है तो आत्मा है ये कैसे जाना। उसे भगवान ने कैसे जाना।इसका मतलब हम उसे जान सकते है। कहता हूं कहे जाट हूँ कहु बजाए ढोल, स्वासा खाली जाट है तीनलोक का मोल, ऐसे महंगे मोल का एक स्वास जो जाए, चौदह लोक न पट तरे काहे घुल मिलाये। मृग नाभि कुंडल बसे, मृग ढूंढे बन माहे, ऐसे घट घट ब्रह्मा है दुनिया जानत नाहे। शांति बाहर नही अपने अंदर ही मिलेगी।
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में महाराज जी ने शुभकामनाएं दी।
समारोह में भाग लेने के लिए भारत के दिल्ली, कोलकत्ता, बिहार, दार्जीलिंग, सिलीगुडी, सिक्किम, भूटान, अर्जेंटीना,अमेरिका, आस्ट्रेलिया सहित अनेक देशो से भक्तगण पधारे हुए थे। कार्यक्रम में श्री गुरु महाराज जी ने हाम्रो नेपाल, राम्रो नेपाल से शुरुवात जैसे किया सत्संग पंडाल में सभी भक्तों द्वारा जयकारों से गुंजायमान था। अपने इष्ट गुरुदेव के आगमन से लोगो का चेहरा प्रफुलित नज़र आ रहा था। कार्यक्रम में बच्चों द्वारा नाटक, भजन प्रस्तुति किया गया। जो भक्तों का मन मोह लिया। समिति के सांस्कृतिक विभाग ने कई आध्यात्मिक कार्यक्रम किया। इस अवसर पर माता अमृता जी, विभुजी महाराज, सूयश जी महाराज भी उपस्थित थे। इसी के साथ नेपाल मानव धर्म सेवा समिति के तत्वावधान में धुलाबारी, झापा में दो दिवसीय विराट सत्संग समारोह आज सम्पन्न हुआ।

