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मानवता की सेवा में समर्पित श्री सतपाल जी महाराज

(जन्म दिवस पर विशेष)

हिम बहादुर, सिलीगुड़ी।
मानव समाज मे सदभावना को बनाये रखने के लिए निरंतर प्रयासरत सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज जी का आज पावन जन्मोत्सव देश-विदेशो में धूम धाम में मनाई जा रही है। श्री सतपाल जी महाराज आध्यात्मिक, सामाजिक एवं राजनैतिक स्तर पर सक्रिय रहते हुए मानव समाज की सेवा में संलग्न है। मानवता की सेवा में समर्पित श्री सतपाल जी महाराज विशेषकर अपनी जन्मभूमि उत्तराखंड की सेवा के लिए जीवन पर्यन्त संकल्पित है तथा आज अपने 68वें बसंत पूरे कर श्री महाराज जी 69वें बसंत में प्रवेश कर रहें है। हम उनके मंगलमय जीवन की कामना करते है।

इस शुभ बेला पर देश-विदेश के अनेक प्रान्तों में मानवता के अग्रदूत श्री महाराज जी के अनुयायी पावन जन्मोत्सव मनाते हुए बधाई दे रहे है। इस महान भारत भूमि पर सनातन काल से ही जीवन की सुख शांति व समृद्धि हेतु ऋषि-मुनियों का उद्घोष रहा है कि ” धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो।” इसी उद्देश्य को चरितार्थ करते हुए हुए श्री महाराज जी और उनके कल्यणकारी ज्ञान के प्रचारक संतजन एवं भक्तगण देश दुनिया में मानवता की रक्षा हेतु अध्यात्म तत्वज्ञान का संदेश फैलाने की सर्वोच्च सेवा कर रहे है। आपने ज्ञान-विज्ञानमय प्रवचनों में अध्यात्म की सर्वकल्याणकारी दिशा प्रशस्त की है।

श्री महाराज जी के असीम अनुकंपा से अन्तश्चेतना में ईश्वर के अमृत अखंड नाम एवं परम प्रकाश का दीप जलाकर धरती पर आपसी सद्भावना तथा सच्ची शांतिमय प्रगति का दीप जलाकर धरती पर आपसी सद्भावना तथा सच्ची शांतिमय प्रगति व खुशहाली के लिए निरंतर सत्संग की ज्ञान गंगा चारों दिशाओं में प्रचार केंद्रों के द्वारा सारे मानव समुदायों को प्रवाहित की जा रही है। आपके के ही आशीर्वाद से मिशन एजुकेशन के द्वारा भारत सहित छह देशो में गरीब बच्चों को स्टेशनरी वितरण में करीब पांच लाख बच्चों तक युवा टीम ने सेवा पहुँचाने का कीर्तिमान कायम करते हुए गेनिस ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हुआ है। जो श्री विभु जी महाराज एवं श्री सुयश जी महाराज के कुशल निर्देशन में चलाया जा रहा है।

श्री महाराज जी के आशीर्वचन से मन के अंदर विचारों का संकल्प-विकल्प अक्सर मानव को बेचैन करता है। उसे सत्संग के अंदर विचार मंथन से विवेक मिलता है जो जिज्ञासु को दुर्लभ तत्वज्ञान की प्राप्ति तक ले जाता है। जो भी भक्त आपके विशुद्ध प्रेम से आपके श्री चरणों मे आया है वह आप ही का होकर आनंदमय हो गया है।
आज विज्ञान और तकनीकी से हम लोग परिचित हैं पर मानव को मानवता की पहचान कराने वाले शाश्वत ज्ञान-विज्ञान अर्थात अध्यात्म को हमें अपने और दूसरों के कल्याण हेतु समझना सबसे जरूरी और सर्वोपरि है। क्योंकि इसके जाने बिना हम अति उच्च प्रगति के बावजूद आपसी मतभेद, अहंकार, स्वार्थ, हिंसा और दुर्भावना के चलते अशांति और विनाशकारी संकटों से बच नही सकते। मनुष्य को बदलना तभी संभव है जब उसकी वृतियों, भावनाओं, और आदतों को उत्पन्न करने वाले भावों की धारा को बदला जाए। जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तीन तैसी। श्री महाराज जी आज परिवार, समाज, देश व विश्व मे सद्भावना का आह्वान कर रहे है।

सद्भावना ही आज मानव को बचा सकती है। आज के संशय, भ्रम व सामाजिक बुराइयों से आजादी के लिए हर नागरिक को सद्भावना से जागरूक होकर सद्भावना के ज्ञान का प्रचार-प्रसार करने की प्रेरणा दे रहे है। जैसे एक लोहा अगर चुम्बक के समीप जाता है तो उसमें भी चुम्बकीय शक्ति आ जाती है। इसी तरह श्री गुरु महाराज जी का ज्ञान मन के अंदर प्रकाश करता है। मानव समाज के जीवन को सरल और वास्तव में सफल बनाने के लिए लोगों की वैचारिक एकता आवश्यक तत्व है जिसमें मानव-मानव तथा विश्व की सच्ची भक्ति छिपी है। यही है महापुरूषों का दर्शन, ज्ञान व आशीर्वाद। श्री महाराज जी की असीम अनुकंपा से देश-विदेशों में शृंखलाबद्ध सद्भावना सम्मेलनों के विराट आयोजनों से हजारों-हजार मानव हृदय सत्संग की ज्ञान अविरल धारा में स्नान करके धर्म व राष्ट्रीय एकता के शाश्वत सूत्र का साक्षात्कार कर जीवन सफल बना रहे है।

मानव धर्म के प्रणेता सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज के शिष्य व अनुयायी संतमहात्माओं के द्वारा आत्म ज्ञान के प्रचार-प्रसार से भक्तों के जीवन में एक अकल्पनीय परिवर्तन आया है। श्री महाराज जी के अथक प्रयास तथा कल्याणकारी चिंतन से देश के पूर्वांचल आसाम, दार्जीलिंग, सिलीगुड़ी तथा उत्तर बंगाल के विभिन्न चाय बागानों के गरीब मजदूरों का जीवन सफल हुआ है। इसी तरह असंख्य आत्मानुभूति प्रेमी-भक्तो ने अपने अंदर परम ज्योति का ध्यान कर अपने जीवन को सफल व सार्थक बनाया है। असत्य का मार्ग छोड़ आज सत्य पथ पर अग्रसर है। मानव की समस्त अज्ञानता का विनाश ईश्वर के पावन अमृत नाम एवं परम प्रकाश के तत्वज्ञान से ही होता है यदि वह समय के सत्पुरुष की शरण में समर्पित हो। मन के दुःखदायी चक्रव्यूह के बीच जीवन का आनंद पाने के लिए सर्वकल्याणकारी सद्भावना सम्मेलनों का आयोजन देश-विदेश में परमपूज्य श्री सतपाल जी महाराज जी की कृपा से होता आ रहा है।

वेद-उपनिषद, गीता, रामायण,कुरान, बाइबिल व गुरु ग्रंथसाहिब की सार बातों को जन-जन में सरलता से समझाते हुए उन्हें ज्ञान का पात्र बनाकर उस घट-घटवासी प्रभु के नाम व प्रकाश का साक्षात्कार उनके हृदय में कराया। वेद, शास्त्रों व धर्मग्रंथो के अनुसार उन्होंने सच्चे तत्व जिज्ञासुओ को आत्मतत्व का प्रत्यक्ष बोध प्रदान कर आत्मा के जगत में दूसरा जन्म देकर द्विज बना रहे है।

परम पूज्य श्री सतपाल जी महाराज आधुनिक युग के ऐसे कर्मयोगी सत्पुरुष है जिनका बहुआयामी व्यक्तित्व उनके पल-पल के अनेक महान कार्यो, योजनाओं के अद्भुत क्रियान्वयन एवं उनकी महान उपलब्धियों से स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रहा है।