Site icon DHURANDHAR TIMES

भविष्य में एक गंभीर समस्या बनने वाली है, इसलिए पानी को बचाना होगा : सतपाल जी महाराज

हिम बहादुर सोनार/सिलीगुड़ी  :  ‘ज्योत से ज्योत जलाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो‘ सुमधुर स्वर में भजन के साथ 31 दिसंबर का रात बारह बजे अपार जन समूह तथा प्रेमी भक्तों के बीच मोमबत्ती जलाकर नववर्ष का स्वागत किया। इस अवसर पर मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में 30 व 31 दिसंबर को दो दिवसीय सदभावना सम्मेलन का समापन किया गया। सिलीगुड़ी के सालुगड़ा निकट महानंदा नदी के पास मानव धर्म आश्रम, ग्राम मझुवा में  सदभावना सम्मेलन तथा नववर्ष के आगमन में अपार जनसमूह को आशीर्वचन देते हुए मानव धर्म के प्रणेता सद्गुरुदेव से सतपाल जी महाराज ने कहा कि अंधकार से प्रकाश की ओर जाये।असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मामृतं गमय। ईसी प्रकार से 2018 पूरा करते हुए 2019 में प्रवेश करेंगे। श्री महाराज जी ने कहा गुजरात में हमने एक पदयात्रा निकाला था। वहाँ से साबरमती आश्रम में हमे लोगो ने सम्मान किया तथा वहाँ हाल में लिखा था कि अंधकार जितना भी गहन क्यो न हो उसको प्रकाश की एक किरण उस अंधकार को समाप्त करती है। नववर्ष सबके लिए मंगलमय हो। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् । मंत्र दृष्टा कहता है कि हे प्रकाश स्वरूप परमात्मा मैं तेरा ध्यान करता हूँ। ये जो ध्यान करने की विधि है इसी का ज्ञान सद्गुरु महाराज देते है। कबीर दास जी ने कहा है कि
गुरु को कीजिये दंडवत, कोटि कोटि प्रणाम। 
कृत न जाने भृंग को, गुरु करले आप समान।
आगे श्री महाराज जी ने कहा कि भगवान कृष्णा अर्जुन को समझाते हुए तात्माष कालेषु युद्धच:। तू सब काल मे सुमिरण कर सकता है।अब कैसे करोगे। अगर नही करते है तो भगवान का निरंतर ध्यान कैसे होगा। वह ध्यान सोते, जागते, उठते, बैठते निरंतर कर सकते है। अगर चिंतन करे तो रात के नींद में आँखे बंद हो जाती है। गाढ़ निद्रा में जाते है तो कानो से सुनता भी नही है। हाथ पैर भी नही चलता है। आँख का खुला रहना भी निरंतर नही होता है।फिर भी वह निरंतर गति से चल रहा है वह है हर मनुष्य का स्वास।इसलिए कहा भी है कि निरंजन माला घट में फिरे दिन रात, ऊपर आवत नीचे जावत स्वास्-स्वास् चल जात, संसारी नर समझे नही बिरथा ऊमर बिहात। संतो ने इसी प्राणों के शक्ति को समझने के लिए कहा है। करता हूँ कह जाट हूँ, कहूँ बजाए ढोल, स्वासा खाली जात है तीन लोक का मोल, ऐसे महंगे मोल का एक स्वास् जो जाए, चौदह लोक पटतरे।इस स्वास् को अनमोल बताया। भगवान कृष्ण अर्जुन को कहते है कि यह ज्ञान मैने कल्प के आदी (सृष्टि) में विविष्मान को दिया था।उसके बाद राजा इच्छाकु फिर राज ऋषियों को यह ज्ञान दिया गया। उसके बाद यह ज्ञान लुप्त हो गया था, नाश नही।इसको पुनः जागरण, प्रगट करने के लिए समय-समय पर महानपुरुष आते है। इसलिए तुलसीदास कहते है कि  जब-जब होई धरम की हानि, बारहि असुर अधम अभिमानी। तब तक धर प्रभू विविध शरीरा, हरहि दयानिधि सच्जन पीड़ा। श्री महाराज जी ने कहा कि वाई-फाई हर जगह मौजूद है पर बिना परवार्ड के उसे कनेस्ट नही हो सकता। इसी तरह प्रभु का ज्ञान ही पासवर्ड है।

जब थोड़ी बर्षा होती है तो पहाड़ो में बर्फ जम जाती है। हम समझने लगते है कि पानी आ गया है तो बर्फ जम रही है। पर ऐसा नही है। पानी का स्तर काफी नीचे जा रहा है। जहाँ बोरिंग करके पम्प लगाते थे सौ फुट में पानी आता था अब वहा पर दो सौ फुट नीचे जाना पड़ रहा है। जहाँ हज़ार फुट में पानी आता था अब वहाँ दो-दो हज़ार फुट नीचे जा रहे है। भविष्य में इससे एक गंभीर समस्या बनने वाली है। आज हम दन्त मंजन करते है तो पानी का नल खुला छोड़ देते है। वह चलता रहता है।कोई भी आदमी पानी को बचाने के लिए सोचता ही नही है।जहाँ पर हम एक बाल्टी से स्नान कर सकते है। वहाँ पर चार बाल्टी खर्च कर देते है। इससे साफ पता चलता है कि आने वाला समय मे पानी पर लड़ाई होगी। इसलिए आज से ही हमे पानी को बचाना है। यह बातें आज सिलीगुड़ी स्थित सालुगड़ा के मझुवा ग्राम में सदभावना सम्मेलन के दौरान मानव धर्म के प्रणेता सद्गुरुदेव श्री सतपाल जी महाराज ने कहा।
मानव सेवा दल के पी टी परेड तथा नन्हे बच्चों के रंगारंग कार्यक्रम में बोलते हुए श्री महाराज जी ने कहा कि महात्मा गांधी स्वच्छता का आन्दोलन चलाते थे। जब गांधी जी साबरमती आश्रम में थे तो उन्होंने सबेरे एक बाल्टी पानी मंगवाई। उसी पानी से मुँह धोने लगे इतने में किसी ने कहा कि बापू जी आपके सामने से साबरमती बह रही है। सामने में पानी ही पानी है और आप एक बाल्टी से मुँह धोना, उसीसे कुल्ला कर रहे है आप आज्ञा दे तो ओर पानी निकाल ले। उतने में गाँधीजी ने कहा कि यह साबरमती राष्ट्र का सम्पति, खजाना है। इस राष्ट्र का खजाने में मेरा अधिकार केवल एक बाल्टी से काम चलाना है। इसलिए हम सबका फर्ज है कि पानी को बचाये। आगे उन्होंने कहा कि सतत अभ्यास आदमी को पूर्ण बनाता है। आपने जो अभ्यास किया आपकी मेहनत नज़र आती है।उसमें जो प्रतिभागी है वह सभी ने मेहनत की।जिसका परिणाम यह कार्यक्रम सफल हुआ। मानव सेवा दल के टोली को संबोधन में कहा कि यहाँ पर जो टोली ने अभ्यास किया है अन्य क्षेत्रों में भी इसका अभ्यास होना चाहिए। हमारी युवा शक्ति को इसमें शामिल होना चाहिए। युवाओं में अच्छे संस्कार की जरूरत है। गांव में स्वच्छता का कार्यक्रम है हम भी गांव के अंदर स्वच्छता का आंदोलन कर सकते है। अपनी मेहनत से गांव को स्वच्छ बना सकते है। श्री महाराज जी ने कहा कि पिछले बार मुझे सिक्किम  के एक गांव में जाने का मौका मिला।गांव में सभी बच्चों ने टोकरियां बनाई, सारे गांव को साफ किया फिर उसी टोकरी को कूड़ादान (Dustbin) बना दिया।

हमारे संतो ने कहा कि ‘गो धन, गज धन, बाज धन और रतन धन खान ! जब आवे संतोष धन,  सब धन धुरी समान !!’ आज सरकारें कहती है कि हमारे प्रजा सुखी नही है।प्रजा में हैप्पीनेस नही है। हमारा कार्य करने का तरीका सही नही है। यहाँ पर हम हैप्पीनेस प्राप्त करने आते है। आज प्रशन्नता होती है कि हम गुरु दरबार में पहुँचे। यहाँ से आप सभी ज्ञान का संदेश लेकर जाते है आप सभी मिलकर कार्यक्रम को सफल बना सकते है तो राष्ट्र को भी सफल बना सकेंगे।सबका अपने आप का रोल होता है।सबको अपना योगदान करना चाहिए। आगे गुरु महाराज जी ने कहा कि एक चिड़िया थी जंगल मे भयंकर आग लग गई। चिड़िया अपने चोंच में पानी लेती और पानी के बूंदे जंगल के आग में डाल देती थी।किसी ने कहा कि यह तुम क्या कर रही हो। यह आग के लपटों में जल जाओगी, झुलस जाओगी। तुम्हारी यह एक-एक बूंद पानी जंगल का आग कैसे बुझेगा। उस चिड़िया ने कहा कि जब इतिहास लिखा जाएगा उसमे जंगल जलाने वाले में से होंगे।लेकिन उसमें मेरा नाम नही होगा। उस चिड़िया ने जंगल को बचाने का मेहनत की और अपना साहयोग दिया। हमे भी भारत को एक करने, भारत को बचाने, भारत को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास होना चाहिए।

मानव धर्म के प्रणेता सद्गुरुदेव श्री सतपालजी महाराज सिलगुड़ी के सालुगाड़ा स्थित उत्तर पलास, मानव धर्म आश्रम मे पहुँचने पर जोरदार भव्य स्वागत किया गया । श्री महाराज जी को बागडोगरा हवाईअड्डा पर सिक्किम के पूर्व मंत्री गिरिशचन्द्र राई, विष्णु प्रधान, जे पी अग्रवाल, डी सी राई, अमरनाथ महतो, मेघनाथ छेत्री सहित समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओ ने स्वागत किया ।
हवाईअड्डे से सीधे सड़क मार्ग होते हुए प्रवचन स्थल पहुँचने पर आदिवासी सांस्कृतिक नृत्य तथा खरसाङ के  हंस व्याण्ड के अगुवाई मे दिव्य आवास तक जोरदार स्वागत करते हुए मानव सेवा दल के  दार्जीलिङ मण्डल ने गार्ड अफ अनर प्रदान किया गया । श्री महाराज ने  मानव सेवा दल का  झंडोत्तोलोन किया  । उनके  साथ माता अमृता जी, जेष्ठ पुत्र विभुजी महाराज, माता आराध्य, द्वितीय पुत्र श्री सुयश जी महाराज, श्रीयांश जी भी पधारे हुए थे। नववर्ष के आगमन में श्री गुरु महाराज जी के अमृतमय प्रवचन, दर्शन का लाभ प्राप्त करने के लिए सभी संत-महात्मा, विद्धवान, श्रद्धालु भक्तगण देश-विदेश के कोने-कोने से आये हुए थे।